बच्चों को रुपये देकर ही जिम्मेदारी पूरी न समझें अभिभावक, उनसे हिसाब भी लें

 


बच्चों को रुपये देकर ही जिम्मेदारी पूरी न समझें अभिभावक, उनसे हिसाब भी लें


 


रोहतक। नशा, नाश का द्वार है। यह व्यक्ति ही नहीं समाज को भी खोखला कर रहा है। युवा इस लत का तेजी से शिकार बन रहे हैं। कहीं शौक तो कहीं गलत संगत उन्हें नशे के दलदल में धकेल रही है। नशे पर अंकुश के लिए अभिभावकों की बड़ी जिम्मेदारी बनती है। वे बच्चों को रुपये देकर ही अपनी जिम्मेदारी पूरी न समझें। उनके दिए रुपये का हिसाब लें और नजर भी रखें।


 

सरकार और पुलिस भी नशे के कारोबार पर अंकुश लगाए। हम सभी मिल कर चलेंगे तो ही इस समस्या को खत्म किया जा सकता है। अपने समाज और राष्ट्र को बचाने की यह चिंता युवाओं ने जताई है। शनिवार को अमर उजाला के सिटी कार्यालय में युवा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद कार्यक्रम में युवाओं ने नशे को समाज के लिए चिंताजनक बताया।
युवा नशे की ओर बढ़ रहा है। यह चिंता का विषय है। युवाओं को नशे के दलदल में गिरने से बचाने के लिए सख्त कानून के साथ हमें भी अपनी सोच बदलनी होगी। सोच में बदलाव से असर होगा। इसके लिए युवाओं को जागरूक बनाने की जरूरत है। उन्हें नशे के परिणाम से अवगत कराकर यह प्रयास किया जा सकता है।
हरिओम, छात्र।
हमें नशे के खिलाफ मुहिम छेड़नी होगी। इसमें जागरूकता कार्यक्रम अहम है। इसमें युवाओं को नशे के बारे में बताने से ज्यादा उसके दुष्परिणामों और नशे से जीवन बर्बाद कर चुके लोगों से बातचीत कराई जाए। पीड़ित खुद बताए, अपनी आपबीती। इससे हम सही जगह पर वार सकेंगे और नशे के बढ़ते दायरे को न केवल रोक सकेंगे, बल्कि इस कुरीति को समाप्त भी कर सकेंगे।
सचिन, छात्र।
नशा समाज और देश दोनों के लिए खतरनाक है। यह व्यक्ति के साथ समाज और देश को भी खत्म कर देता है। नशा कहीं न कहीं पुलिस के संरक्षण में फैल रहा है। लंबे समय से थाने और चौकियों में बैठे पुलिस के जवानों के नशा बेचने वालों से लिंक होते हैं। ये इन्हें सपोर्ट करते हैं और नशा धड़ल्ले से बिता है, जबकि इस पर अंकुश की जरूरत है।
नवीन शर्मा, अधिवक्ता।
हमारा ज्यूडिशियल सिस्टम और पुलिस भ्रष्टाचार की दलदल में गहरे धंसे हैं। इस कारण नशे की कुरीति समाज में तेजी से पांव पसार रही है। देश के बाहर से नशे की खेप आ रही है। युवा इस गर्त में धंसता जा रहा है। कुछ नशा करके तो कुछ नशा बेच कर जीवन बर्बाद कर रहे हैं। पुलिस इन मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई करे और अदालतें जल्द सख्त फैसला दें तो नशा रुक सकता है।
सिमरन सचदेवा, छात्रा।
नशे पर अंकुश जरूरी है। सभी को योग जरूर करना चाहिए। यह हमारी बुरी आदतें खत्म करने में मदद करेगा। सरकार को इस ओर सख्त कदम उठाने चाहिए। अभिभावक भी अपनी जिम्मेदारी समझें। वे अपने बच्चों की संगत को देखें व समझें। शिक्षण संस्थानों में नशा बिकता है। इस पर रोक लगनी चाहिए। ये सब प्रयास नशे पर अंकुश लगाएंगे।
मंजू, छात्रा।
शिक्षक संस्थानों से होकर नशे की जड़ें शुरू होती हैं। इसलिए सबसे ज्यादा यहीं ध्यान देने की जरूरत है। अभिभावक व शिक्षक बच्चों के व्यवहार व आदतों पर नजर रखें। नशे की लत लगने से पहले ही उसे सही राह पर लाने का प्रयास करें। अभिभावक बच्चों से लगातार संवाद करते रहे। उनकी समस्याओं को जानने के साथ दिए गए खर्च का हिसाब रखें।
गरिमा सचदेवा, छात्रा।
युवा नशे की ओर बढ़ रहे हैं। कोई पढ़ाई के लिए तो तनाव के चलते नशा कर रहा है। खेल भी अछूता नहीं है। खिलाड़ी अपने बेहतर प्रदर्शन के लिए इंजेक्शन लगा रहे हैं। उन्हें इसके दुष्प्रभावों की जानकारी ही नहीं है। इस कारण वे नशे का शिकार बनते जा रहे हैं। युवाओं को इस बारे में जागरूक बनाने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए।
विजय कुमार, छात्र।
नशे का इंजेक्शन बीमारियां देता है। कई युवाओं की तो मौत तक हो चुकी है। इसके बावजूद युवा नशे के इंजेक्शन की गिरफ्त में हैं। वजह है उनका निरंकुश होना। पहले की तरह सामूहिक परिवार नहीं हैं। एकांकी परिवार में अभिभावक रुपये देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं। ऐसे में अकेला युवा पथ से भटक कर नशे की गर्त में गिर रहा है।
शकीन पोसला, सेक्टर चार, रोहतक।
नशे से नई पीढ़ी का बचपन में ही परिचय हो जाता है। गांवों में माहौल ही बच्चों को नशे की ओर ले जाने वाला है। यहां छोटे-बड़े सब साथ बैठ कर हुक्का पीते हैं। नशे की यह शुरूआत युवाओं को गहरी गर्त में ले जाती है। परिजनों को अपने बच्चों की संगत से रूबरू होना चाहिए। समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को भी आगे आने की जरूरत है।
अशोक कुमार, बोहर।
युवा अक्सर शौक या बीड़ी सिगरेट से नशे की शुरुआत करता है। इनकी ओर या तो वह दूसरों को देखकर आकर्षित होता है या फिर दोस्तों के दबाव में। ये दोनों की चीजें खतरनाक हैं। दूसरों को देखकर आदमी जल्दी सीखता है। इसलिए विज्ञापन व फिल्मों में ऐसे दृश्य पूरी तरह बैन होने चाहिए। युवाओं को दोस्तों के दबाव में नहीं आना चाहिए।
पल्लवी हांडा, शिक्षिका।
नशे से बचाव का पहला प्रयास व्यक्ति का अपना का फैसला होता है। आसपास अच्छे माहौल में रह कर भी व्यक्ति बुराई में घिर सकता है। इसलिए हम खुद अपने भले बुरे का फैसला लें व बच्चों को बुरी संगत से दूर रखें। युवा पीढ़ी की काउंसलिंग करानी चाहिए। उन्हें हकीकत से अवगत कराया जाए। इसके लिए नशा मुक्ति केंद्रों का दौरा कराया जाए।